हां, मैंने प्रेम करना अपने प्रियतम से सीखा है।। कर्तव्यों के पथ पर चलते हुए भी प्रेम किया जा सकता है.... जिम्मेदारियों को निर्वहन करते हुए भी प्रेम किया जा सकता है... बिना जताए और बिना बताए भी प्रेम किया जा सकता है.... आंखों से बोलकर और होठों को सिलकर दिल से भी प्रेम किया जा सकता है... दुनिया से ओझल इक दुजे से दूर, ख्यालों में हर क्षण अपने प्रिय तम में खोकर बहुत प्रेम किया जा सकता है.... हां प्रेम करना मैंने सीखा है अपने प्रियतम से और ये सीख दुनिया की सबसे अमूल्य सीखों में एक है!
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