Poems



 विद्युत कर्मी 

  Dheer       2021-03-27 08:45:18

कट रही है ज़िन्दगी, जैसे,जी रहे वनवास में l
हम विधुंत कर्मी है, ड्यूटी करें हर सांस में।

हम फंसे इस जाल में, सब चिंता करते गांव में,
जिंदगी मानो ठहर गई है, बेडी जकडी पाँव में। 

सबकी  छुट्टी हो गई, बिजली ने पकडी रफ्तार, 
फिर भी लोग कहे, बैठा कर पैसा देती है सरकार। 

घर में राशन नही, फिर भी ड्यूटी जाते है, 
सारी दुकाने बन्द हो जाती, जब हम वापस आते हैं। 

माँ बाप सिसककर पूछ रहे,बैटा तुम कैसे खाते हो, 
जब पूरा देश बन्द है तो, तुम ड्यूटी क्यो जाते हो। 

यहाँ सबकुछ मिल रहा, झूठ बोलकर माँ को समझाते है, 
देश के लिये समर्पित जीवन, इसलिए ड्यूटी जाते हैं। 

सेना,शिक्षक,डाँक्टर नही हम, सम्मान नहीं हम पाते हैं,
हम तो विधुंत कर्मी हैं साहब, केवल अपनी ड्यूटी निभाते हैं  ।

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