Poems



 मेरे जनाजे पर अश्क बहाने वाले वाले लोगो 

  Ashok Yogi "Shastri"       2021-02-27 07:24:41

जम्हूरियत -ए- हुक़ूमत हूं पर  वहाबी  नहीं  हूं मै
मयकश -ए- नबी का हूं    पर  शराबी   नहीं हूं मै

माना कि  शौक है   तितलियों  को छूने  का  मुझे
पर, पर कुतर  दू किसी का ऐसा कसाबी नहीं हूं मै

तेरे चिलमन के इंतजार में खुले है  झरोखे अब तलक
अदना सा आदमी हूं कोई ओलीया  नमाज़ी नहीं हूं मै

कभी वो आंखों का सुरूर हुआ करते हमारे  जनाब
अब उसके  सुर्ख होंठों  की  शराब   पुरानी नहीं हूं मै

बहक जाता है  उसकी  बेकसी  के आलम में " योगी"
शायद अब  उसके  ख्वाबों   की  जिंदगानी  नहीं हूं मै

मेरे जनाजे पर अश्क  बहाने   वाले   ना  कदर  लोगो
बद अख्तर न समझ मुझको  इतना   बादाबी नहीं हूं मै
 

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