Poems



 हम महाकाल को पूजने वाले भारत की संतान है  

  Ashok Yogi "Shastri"       2021-04-10 06:59:23

रब ने ब़ख्से सबके हिस्से अवनी अम्बर अग्नि आब़और पौन हैं
फिर  इंसानों   को  काफ़िर   कहने  वाले  ये   ज़ाहिल  कौन  हैं।

जो   सीखाता   हो   नफ़रत   इंसानों   से   वो  अल्लाह  कैसा
या   तो नुक़्स   है ख़ुदा  में  तेरे या  संगदिल  तेरा  दृष्टिकोण  है।

ग़र   ज़न्नत   नसीब   होती   है   तुझे   काफिरों   के  क़त्ल  से 
तो   शियाओं   का   ख़ून   बहाने   वाले   ये   सुन्नी   कौन    हैं।

ग़र   बरसती   है   रहमत   अल्लाह  के  फ़ज़ल  से  दुनियां में
तो मज़लूमों का ख़ून बहाने वालों पर तेरा अल्लाह क्यों मौन है।

यूं  न  मिटा  पाएगा  हस्ती  हमारी  तू  चाहे  जितना  बड़क  ले
मरकर  भी  मिटती नहीं  हस्ती हमारी कहने वाली तेरी कौम है।

मिट   गए   मुहम्मद़ अक़बर   गौरी   और   गज़नवी   जहां   से
घट- घट में बसने वाले राम हमारे अब भी दुनियां के सिरमौर है।

हम    महाकाल    को   पूजने   वाले   भारत   की   संताने   हैं
अर्जुन   से   धनुर्धर   बनाने   वाले   जिन्दा  अभी  गुरु द्रोण हैं  

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